जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली/लोहरदगा: देश के कई हिस्सों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत को लेकर बढ़ती चिंता के बीच सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो सरकार ‘आत्मनिर्भरता’ का दावा करती रही है, वही आज ऊर्जा के क्षेत्र में देश को संकट में छोड़कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ती नजर आ रही है।
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2022 में देश को भरोसा दिलाया गया था कि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी आयात निर्भरता को कम करेगा और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। लेकिन वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि आयात कम करने के बजाय देश अब पहले से ज्यादा दूसरे देशों पर निर्भर हो गया है, जिससे सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच का अंतर स्पष्ट हो गया है।
सुखदेव भगत ने देश में उत्पन्न हो रही ऊर्जा संबंधी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता यह जानना चाहती है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सरकार के पास क्या ठोस रणनीति और उपाय हैं।
वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। उनके अनुसार सरकार इस संभावित संकट का समय रहते अनुमान लगाने और प्रभावी तैयारी करने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल बड़े-बड़े दावे करने तक सीमित है, जबकि जब जिम्मेदारी निभाने का समय आता है तो वह पीछे हट जाती है।
सांसद ने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी का सीधा असर छोटे व्यापारियों, हलवाइयों और होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है। गैस की कमी के कारण कई कारोबार प्रभावित हो रहे हैं और इससे बाजार में महंगाई भी बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि सरकार की अदूरदर्शी नीतियों के कारण आज आम जनता और व्यापारी वर्ग को इस संकट का सामना करना पड़ रहा है।
सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार से मांग की कि कमर्शियल गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि व्यापार और आम लोगों को राहत मिल सके।