जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली/केरल: देश की मुस्लिम राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) अब सांसदों और विधायकों की संख्या के आधार पर देश की सबसे बड़ी मुस्लिम राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है। वर्तमान में IUML के पास कुल 5 सांसद और 24 विधायक हैं, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM इससे पीछे रह गई है। इस राजनीतिक बदलाव ने राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक आंकड़ों के अनुसार IUML के पास लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल 5 सांसद हैं, जबकि केरल सहित विभिन्न राज्यों में पार्टी के 24 विधायक मौजूद हैं। दूसरी ओर AIMIM के पास फिलहाल एक लोकसभा सांसद और सीमित संख्या में विधायक हैं।
IUML मुख्य रूप से केरल की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाली पार्टी मानी जाती है और लंबे समय से कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) का अहम सहयोगी दल रही है। हाल के वर्षों में पार्टी ने स्थानीय निकाय चुनावों और विधानसभा राजनीति में भी अपना प्रभाव लगातार बढ़ाया है। केरल के कई मुस्लिम बहुल इलाकों में IUML की मजबूत पकड़ मानी जाती है।
वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने बिहार, महाराष्ट्र और तेलंगाना में अपनी पहचान जरूर बनाई है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर सीटों और जनप्रतिनिधियों की संख्या के मामले में वह IUML से पीछे दिखाई दे रही है। बिहार के सीमांचल क्षेत्र में AIMIM ने कुछ सीटों पर प्रभाव बनाया, जबकि तेलंगाना के हैदराबाद क्षेत्र में पार्टी का मजबूत जनाधार कायम है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि IUML की ताकत केवल मुस्लिम राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वह गठबंधन राजनीति में भी अहम भूमिका निभाती रही है। पार्टी के कई नेता राज्य और केंद्र स्तर पर मंत्री पद तक संभाल चुके हैं। दूसरी ओर AIMIM आक्रामक भाषण शैली और मुस्लिम मुद्दों पर खुलकर राजनीति करने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा में रहती है।
विश्लेषकों के अनुसार IUML की राजनीति अपेक्षाकृत “सॉफ्ट और गठबंधन आधारित” मानी जाती है, जबकि AIMIM खुद को मुस्लिमों की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज के रूप में प्रस्तुत करती है। यही कारण है कि दोनों पार्टियों की राजनीतिक रणनीति और जनाधार अलग-अलग नजर आते हैं।
हालांकि सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे मुस्लिम राजनीति में “नई दिशा” बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि संख्या के आधार पर किसी पार्टी को सबसे बड़ा कहना पूरी राजनीतिक तस्वीर को नहीं दर्शाता, क्योंकि अलग-अलग राज्यों में दोनों दलों का प्रभाव अलग है।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि IUML की बढ़ती राजनीतिक ताकत ने देश की मुस्लिम राजनीति में एक बार फिर नई चर्चा शुरू कर दी है और आने वाले चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।