जोहार हिंदुस्तान | रांची/झारखंड: झारखंड की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Alamgir Alam को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने और जेल से बाहर आने के बाद राज्य की सियासत अचानक गरमा गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि झारखंड सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल हो सकता है, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari का मंत्रालय बदला जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान और राज्य नेतृत्व के बीच लगातार मंथन चल रहा है। चर्चा इस बात की भी है कि पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की पत्नी और विधायक निशात आलम को सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसी संभावना को लेकर झारखंड कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि अब तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इरफान अंसारी के दिल्ली दौरे ने बढ़ाई अटकलें
राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि मंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच डॉ. इरफान अंसारी अचानक दिल्ली रवाना हो गए, जहां उन्होंने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि उन्होंने संगठन के शीर्ष नेताओं के सामने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कवायद भी शुरू कर दी है।
सूत्रों का दावा है कि केवल इरफान अंसारी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस कोटे से मंत्री बनीं दीपिका पांडे सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की के विभागों में भी बदलाव संभव है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस पूरे मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
आलमगीर आलम को माना जाता है कांग्रेस की ‘रीढ़’
झारखंड कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि आलमगीर आलम संगठन के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं और पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता लगभग सभी गुटों में है। लंबे समय तक संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आलमगीर आलम को कांग्रेस की “रीढ़” माना जाता रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि झारखंड कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती अंदरूनी गुटबाजी रही है। ऐसे में आलमगीर आलम की सक्रिय वापसी पार्टी संगठन को मजबूत कर सकती है और अलग-अलग गुटों के बीच समन्वय स्थापित करने में मददगार साबित हो सकती है।
हेमंत सोरेन से भी बेहतर तालमेल की चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और झामुमो के बीच पिछले कुछ समय से कई मुद्दों पर मतभेद की स्थिति देखने को मिली है। ऐसे में यदि आलमगीर आलम को संगठन या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलती है तो गठबंधन में बेहतर तालमेल बनाने में भी मदद मिल सकती है।
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री Hemant Soren भी आलमगीर आलम को अनुभवी और संतुलित नेता मानते हैं तथा उनकी राजनीतिक समझ का सम्मान करते हैं। ऐसे में उनकी वापसी को कांग्रेस-जेमएम गठबंधन के लिए भी अहम माना जा रहा है।
क्या होगा कैबिनेट में बड़ा बदलाव?
राजनीतिक हलकों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे से बड़ा फेरबदल होने जा रहा है? क्या इरफान अंसारी से स्वास्थ्य मंत्रालय वापस लिया जाएगा? क्या निशात आलम को मंत्री बनाया जाएगा?
इन तमाम सवालों के जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकते हैं, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि आलमगीर आलम की वापसी ने झारखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन बदलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।