जोहार हिंदुस्तान | लोहरदगा/झारखंड : लोकसभा स्पीकर को हटाने की मांग से जुड़े अविश्वास प्रस्ताव को लेकर लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लोकसभा में अपनी बात रखते हुए संसद की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
सुखदेव भगत ने कहा कि संसद के आसन का संबंध किसी बहुमत या सत्ता से नहीं, बल्कि विश्वास और निष्पक्षता से होता है। उन्होंने कहा कि लोकसभा का स्पीकर लोकतंत्र का अंपायर होता है, लेकिन यदि अंपायर ही पक्षपाती हो जाए तो खेल लोकतंत्र का नहीं बल्कि सत्ता का हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इसी कारण विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। भगत ने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है और उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से विपक्ष के नेता राहुल गांधी की आवाज़ को बार-बार दबाया जाता है और उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि जब देश के लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद में ही जनता के मुद्दे गायब होने लगें, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है।
सुखदेव भगत ने कहा कि स्पीकर का पद किसी एक दल का नहीं होता, बल्कि पूरे सदन के विश्वास का पद होता है। इस पद पर बैठे व्यक्ति को पूरी तरह निष्पक्ष रहना चाहिए। यदि विपक्ष को यह महसूस होने लगे कि उनके साथ न्याय नहीं हो रहा है और उन्हें उचित समय नहीं दिया जा रहा है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भले ही विपक्ष के पास इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं है, लेकिन कुछ कदम प्रतीकात्मक होते हैं और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाने के लिए उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने वाला नहीं है।
सांसद भगत ने विपक्षी एकता पर जोर देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर लगभग सभी विपक्षी दल एकजुट हैं। उनका कहना था कि विपक्ष का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि संसद की गरिमा, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब सत्ता और विपक्ष दोनों को समान अवसर और सम्मान मिले।