जोहार हिंदुस्तान | डेस्क/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की “विवादित छूट स्कीम” को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश कुमार हाजरा द्वारा मरीजों को ‘जय श्री राम’ का जाप करने पर फीस में छूट देने की घोषणा के बाद यह मामला अब चिकित्सा नैतिकता और धर्म-राजनीति के मुद्दे से जुड़कर चर्चा में आ गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. हाजरा ने अपनी परामर्श फीस 2000 रुपये से घटाकर 1500 रुपये कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की है कि जो मरीज उनके क्लीनिक में ‘जय श्री राम’ का मंत्रोच्चार करेंगे, उन्हें अतिरिक्त 500 रुपये की छूट दी जाएगी। इस तरह कुछ मरीजों को इलाज में और अधिक रियायत मिल सकती है।
बताया जा रहा है कि यह योजना चुनाव से ठीक पहले लागू की गई है, जिससे इसके पीछे राजनीतिक और वैचारिक संदेश होने की चर्चा भी तेज हो गई है। कहा जा रहा है कि डॉक्टर नरेंद्र मोदी से प्रभावित हैं, जिसे लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस पूरे मामले पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा है कि चिकित्सा पेशा पूरी तरह निष्पक्ष और मानव सेवा पर आधारित होना चाहिए। किसी भी प्रकार से धर्म, राजनीति या आस्था को इलाज और फीस से जोड़ना मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है।
लोगों का मानना है कि डॉक्टरों को नेशनल मेडिकल कमीशन के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसके तहत सभी मरीजों के साथ समान व्यवहार करना जरूरी है। किसी विशेष धार्मिक नारे या आस्था के आधार पर छूट देना भेदभाव की श्रेणी में आ सकता है और इससे चिकित्सा पेशे की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
हालांकि, इस मामले में डॉक्टर का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। सूत्रों के अनुसार, इसे डॉक्टर की व्यक्तिगत आस्था या एक तरह की “प्रमोशनल पहल” बताया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
इस मुद्दे पर आम लोगों की राय भी बंटी हुई नजर आ रही है। कुछ लोग इसे डॉक्टर की व्यक्तिगत पसंद और आस्था बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इसे चिकित्सा पेशे का राजनीतिकरण करार देते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ती है, तो भविष्य में चिकित्सा सेवाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
ऐसे मामलों में IMA या संबंधित नियामक संस्थाएं चेतावनी, जांच या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर सकती हैं। फिलहाल IMA द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद इस पूरे मामले पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। क्योंकि जब इलाज भी आस्था और राजनीति के तराजू पर तौला जाने लगे, तो चिकित्सा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना लाज़िमी है।