जोहार हिंदुस्तान | लोहरदगा/झारखंड: भड़गांव पंचायत अंतर्गत ग्राम डोका एवं करमटोली के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित पारंपरिक “जेठ जतरा” महोत्सव पूरे उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। आदिवासी संस्कृति और परंपरा के प्रतीक इस भव्य आयोजन में आसपास के कई गांवों से जतरा खोड़ा दल पारंपरिक वेशभूषा, ढोल, मांदर, नगाड़ा और लोकगीतों के साथ शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में पारंपरिक संस्कृति की रंग-बिरंगी छटा देखने को मिली और वातावरण लोक आस्था व उत्सव की उमंग से सराबोर हो उठा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला कांग्रेस कमिटी के जिलाध्यक्ष सुखैर भगत अपने पैतृक गांव पहुंचे। उनके साथ जिला सोशल मीडिया प्रभारी प्रकाश उरांव एवं प्रखंड अध्यक्ष सह मुखिया अनिल उरांव भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने सभी अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत अक्षत, अम्बा पानी और तिलक लगाकर गर्मजोशी से स्वागत किया।

जेठ जतरा के दौरान काठ घोड़ा आकर्षण का केंद्र बना रहा। आदिवासी समाज में काठ घोड़ा को ग्राम देवताओं की शक्ति, सुरक्षा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने पूरे विधि-विधान और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अतिथियों को काठ घोड़े पर विराजमान कर पूरे जतरा क्षेत्र का भ्रमण कराया। इस दौरान ढोल-मांदर की गूंज और पारंपरिक नृत्य ने माहौल को पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।

जनसमूह को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष सुखैर भगत ने कहा कि जेठ जतरा केवल एक पर्व नहीं बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति प्रेम और सामूहिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति को भगवान का स्वरूप माना और जल, जंगल एवं जमीन की रक्षा को जीवन का सबसे बड़ा दायित्व समझा। आज भी यह परंपरा उसी मजबूती के साथ जीवित है, जो हमारी सांस्कृतिक पहचान को बचाए हुए है।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी संस्कृति, भाषा, परंपरा और रीति-रिवाजों को बचाना बेहद जरूरी है। जेठ जतरा जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित रखने में आगे आएं और समाज की एकता को मजबूत करें।
इस अवसर पर ग्राम देवता, सरना स्थल एवं प्रकृति की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों ने अच्छी वर्षा, सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और समाज में खुशहाली की कामना की। पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। देर शाम तक पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।
कार्यक्रम में ग्राम प्रधान नारायण भगत, पूर्व उप मुखिया सेराज अंसारी, समाजसेवी गोपाल साहू, मुनेश्वर भगाया, सहावीर भगत, सुरेश भगत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा और विभिन्न गांवों से पहुंचे लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में आपसी भाईचारा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव की अनूठी मिसाल देखने को मिली।