जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली/पटना: क्या जनसूराज पार्टी के सूत्रधार और चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (PK) कांग्रेस पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं? इस सवाल ने देश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। वजह है प्रशांत किशोर की हालिया कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से हुई मुलाकात, जिसे सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार से कहीं आगे का संकेत माना जा रहा है।
यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद जनसूराज पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और कांग्रेस भी बिहार में मजबूत प्रदर्शन नहीं कर सकी। ऐसे में दोनों पक्षों की यह मुलाकात आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक समीकरणों की भूमिका बनती दिख रही है।
तीन साल पुरानी कड़वाहट के बाद मुलाकात
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच रिश्ते पिछले तीन वर्षों से तल्ख रहे हैं। वर्ष 2022 में प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर एक व्यापक रोडमैप दिया था, लेकिन उस समय दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद प्रशांत किशोर कांग्रेस के मुखर आलोचक बन गए थे और उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर खुले तौर पर सवाल भी उठाए थे। ऐसे में अब प्रियंका गांधी से हुई मुलाकात को पुरानी दूरी खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
बिहार चुनाव के बाद बदली राजनीतिक तस्वीर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मुलाकात बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के बाद और भी अहम हो जाती है। जनसूराज पार्टी पहली बार चुनावी मैदान में उतरी, लेकिन उसे कोई सीट हासिल नहीं हो सकी। हालांकि, कई सीटों पर पार्टी ने उल्लेखनीय वोट शेयर हासिल कर पारंपरिक दलों को नुकसान जरूर पहुंचाया।
वहीं कांग्रेस भी बिहार में अपनी पुरानी स्थिति को वापस पाने में नाकाम रही। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों ही पक्ष नई रणनीति और नए गठजोड़ की तलाश में हैं।
रणनीतिकार से नेता तक का सफर
प्रशांत किशोर देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकारों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने अतीत में नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी और जगन मोहन रेड्डी जैसे नेताओं के लिए सफल चुनावी रणनीतियां बनाई हैं। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में उतरते हुए जनसूराज अभियान और फिर जनसूराज पार्टी की शुरुआत की। हालांकि, चुनावी नतीजों के बाद यह साफ हो गया कि जमीनी राजनीति में पार्टी को अभी लंबा संघर्ष करना होगा।
आत्ममंथन और संकेत
चुनावी हार के बाद प्रशांत किशोर ने बिहार के गांधी आश्रम में मौन उपवास भी किया था, जिसे उन्होंने आत्ममंथन का हिस्सा बताया। उन्होंने यह भी कहा था कि राजनीति में हार मिलना कोई अपराध नहीं है और वे पूरी तरह राजनीति छोड़ने वाले नहीं हैं। इसी पृष्ठभूमि में प्रियंका गांधी से मुलाकात को राजनीति में नई दिशा तय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम हैं प्रशांत किशोर?
कांग्रेस लंबे समय से संगठनात्मक कमजोरी और चुनावी रणनीति को लेकर जूझ रही है। ऐसे में प्रशांत किशोर जैसे रणनीतिकार और जमीनी अभियान चला चुके नेता का पार्टी से जुड़ना कांग्रेस के लिए नई ऊर्जा और नई सोच ला सकता है। हालांकि, अभी तक कांग्रेस या प्रशांत किशोर की ओर से किसी औपचारिक राजनीतिक गठजोड़ या पार्टी में शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है।
आने वाले दिनों में बड़ा सियासी संकेत संभव
फिलहाल यह मुलाकात अटकलों के केंद्र में है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि दिल्ली से लेकर बिहार तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यदि प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल होते हैं, तो यह न सिर्फ जनसूराज पार्टी के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि विपक्षी राजनीति में भी एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में प्रशांत किशोर और कांग्रेस के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं — महज़ मुलाकात तक सीमित रहते हैं या देश की राजनीति में किसी बड़े फैसले की भूमिका बनते हैं।
