जोहार हिंदुस्तान | डेस्क/नई दिल्ली: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। मामले से जुड़े कई वायरल ऑडियो के सामने आने के बाद VIP गेस्ट कौन था उसके नाम के खुलासे की मांग तेज हो गई हैं और राज्य में विरोध-प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है।
ताज़ा घटनाक्रम में हरिद्वार पुलिस ने BJP के पूर्व विधायक सुरेश राठौर के आवास पर नोटिस चिपकाया है और उन्हें थाने में उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। यह कार्रवाई उस ऑडियो के सामने आने के बाद हुई है, जिसमें सुरेश राठौर कथित तौर पर एक्ट्रेस उर्मिला से फोन पर बातचीत के दौरान BJP के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम का नाम लेते हुए दावा करते हैं कि अंकिता भंडारी की हत्या की रात वे घटनास्थल पर मौजूद थे।
दो FIR, ऑडियो बना विवाद की जड़
इस ऑडियो के वायरल होते ही पुलिस ने दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। एक FIR सुरेश राठौर के खिलाफ और दूसरी एक्ट्रेस उर्मिला के खिलाफ दर्ज की गई है। हालांकि BJP के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम के खिलाफ अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि ऑडियो और वीडियो क्लिप्स के आधार पर यह जांच की जा रही है कि कहीं मामले को भड़काने या जांच को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं की गई।
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने गृह विभाग से शिकायत कर कहा है कि उनका नाम जानबूझकर बदनाम करने के उद्देश्य से जोड़ा जा रहा है और वायरल ऑडियो फर्जी है।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड
गौरतलब है कि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। आरोप है कि रिज़ॉर्ट में काम करने के दौरान उस पर एक रात एक VIP मेहमान को “विशेष सेवाएं” देने का दबाव बनाया गया, जिसका उसने विरोध किया। और इस पूरे मामले को उजागर करने की बात कही इसके बाद सितंबर 2022 में उसकी हत्या कर शव को चिल्ला नहर में फेंक दिया गया।
इस मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा मंत्री का बेटा), सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता के परिजनों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया था।
SIT जांच और CBI की मांग
सरकार की ओर से गठित SIT (विशेष जांच टीम) ने इस केस की जांच की थी, जिसे अदालतों ने पहले पारदर्शी माना था। बावजूद इसके, अब नए ऑडियो विवाद के बाद CBI जांच की मांग फिर से तेज हो गई है।
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि हत्या की रात मौजूद ‘VIP’ का नाम अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया, जो संदेह को और गहरा करता है।
सड़कों पर उतरे लोग, प्रदेश में प्रदर्शन
ऑडियो विवाद सामने आने के बाद देहरादून, हरिद्वार और अन्य जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले की CBI से जांच कराई जाए, हत्या की रात मौजूद VIP गेस्ट का नाम उजागर किया जाए, जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाए।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। वहीं भाजपा ने इसे विपक्ष की साजिश बताते हुए कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और दोषियों को सजा मिल चुकी है।
बड़ा सवाल अब भी कायम
हालांकि दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन “VIP कौन था?” यह सवाल एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। वायरल ऑडियो, नई FIR और पूर्व विधायक पर कार्रवाई ने इस केस को फिर से राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया है।
अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस नए विवाद में क्या निष्कर्ष निकालती हैं और क्या VIP गेस्ट को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब जनता के सामने आ पाते हैं या नहीं।
