जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राममनोहर मिश्र द्वारा एक मामले में की गई टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि “पीड़िता के स्तन पकड़ना, पजामे का नाड़ा तोड़ना, खींचकर ले जाना इसे रेप या रेप की कोशिश का अपराध नहीं माना जा सकता।”
सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी को “अनुचित और अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि हाईकोर्ट का यह आदेश न सिर्फ गलत है बल्कि निचली अदालत में चल रही सुनवाई को प्रभावित कर सकता है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट कहा कि हम हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करेंगे और ट्रायल जारी रहने देंगे।
कासगंज का है मामला
यह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले का है, जहां 14 साल की एक नाबालिग लड़की ने 3 युवकों—पवन, आकाश और अशोक के खिलाफ रेप के प्रयास की FIR दर्ज कराई थी।
FIR के मुताबिक आरोपियों ने लड़की को रास्ते में रोका, उसके साथ छेड़छाड़ की, कपड़े फाड़े और जबरन खींचकर ले जाने की कोशिश की।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज किया था आरोप
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप “रेप के प्रयास” की धारा में नहीं आते। इसी दौरान विवादित टिप्पणी भी लिखी गई, जिसके बाद यह आदेश सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि
हाईकोर्ट का आदेश कानून की दृष्टि से गलत है।
संवेदनशील मामलों में न्यायालय को शब्द चयन में अधिक सतर्क रहना चाहिए।
पीड़िता के बयान और केस की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने संकेत दिया कि मामला वापस ट्रायल कोर्ट में चला जाएगा और सबूतों के आधार पर आगे की सुनवाई जारी रहेगी।
