जोहार हिंदुस्तान | डेस्क/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में वर्ष 2016 में राष्ट्रीय राजमार्ग पर मां और उसकी नाबालिग बेटी के साथ हुए जघन्य गैंगरेप मामले में नौ साल बाद न्याय की बड़ी जीत सामने आई है। इस बहुचर्चित मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) ओमप्रकाश वर्मा तृतीय की अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए सभी पांचों अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। दोषियों को 22 दिसंबर 2025 को सजा सुनाई जाएगी।
यह दिल दहला देने वाली घटना 29 जुलाई 2016 को हुई थी, जब एक परिवार नोएडा से शाहजहांपुर की ओर कार से यात्रा कर रहा था। बुलंदशहर के पास हाईवे पर बदमाशों ने सड़क पर भारी वस्तु फेंककर कार को रोक दिया। इसके बाद लुटेरों ने परिवार के पुरुष सदस्यों को बंधक बना लिया और मां-बेटी को पास के खेत में ले जाकर करीब ढाई घंटे तक सामूहिक बलात्कार किया।
पीड़ित नाबालिग लड़की ने आरोपियों को बताया था कि वह उस समय पीरियड्स में थी, इसके बावजूद दरिंदों ने उस पर भी अमानवीय अत्याचार किया। घटना के दौरान आरोपियों ने पीड़ित परिवार से नकदी, जेवरात और मोबाइल फोन भी लूट लिए थे।
इस मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए आरोपियों में जुबेर उर्फ सुनील, साजिद, धर्मवीर, नरेश सहित कुल पांच अभियुक्त शामिल हैं। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, पीड़ितों के बयान और परिस्थितिजन्य प्रमाण आरोपियों के खिलाफ अपराध को पूरी तरह सिद्ध करते हैं।
घटना के बाद यह मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा था। पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल उठने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस केस की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने विस्तृत जांच कर आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे पॉक्सो अधिनियम के तहत विशेष अदालत में चलाया गया।
इस केस ने उस समय उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया था। शुरुआती लापरवाही के आरोप में 19 पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया था। पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की गुहार लगाई थी।
अब विशेष पॉक्सो अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार और समाज के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। नौ साल के लंबे इंतजार के बाद दोषियों के खिलाफ आया यह फैसला यह संदेश देता है कि न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन न्याय से इंकार नहीं।
अब सभी की निगाहें 22 दिसंबर 2025 पर टिकी हैं, जब अदालत दोषियों को उनके अपराध की सजा सुनाएगी।
