जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। बीजेपी नेता और पूर्व लोकसभा सांसद वरुण गांधी के कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अगर यह घटनाक्रम साकार होता है तो यूपी की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक गांधी परिवार के भीतर लंबे समय बाद एकजुटता के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी की वरुण गांधी से हुई मुलाकात को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
गांधी परिवार के करीबियों का मानना है कि वरुण गांधी और राहुल गांधी के रिश्ते पहले से ही बेहतर रहे हैं। प्रियंका गांधी से भी वरुण गांधी के संबंध भाई-बहन के हैं और इससे पहले भी दोनों के बीच मुलाकातें हो चुकी हैं। ऐसे में यह संभावना और मजबूत हो गई है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
2024 लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद से वरुण गांधी बीजेपी में पूरी तरह हाशिए पर नजर आ रहे हैं। सार्वजनिक मंचों से उनकी चुप्पी और सक्रिय राजनीति से दूरी यह संकेत देती है कि वे अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर किसी बड़े फैसले की तैयारी में हैं।
इसी बीच संजय गांधी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जिस तरह से भावनात्मक पोस्ट साझा की गई, उसे भी राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यह संदेश गया कि कांग्रेस नेतृत्व एक बार फिर गांधी परिवार को राजनीतिक रूप से एक मंच पर लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कांग्रेस जिस आक्रामक रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है, उससे साफ है कि पार्टी किसी बड़े चेहरे को आगे लाने की योजना बना रही है। ऐसे में वरुण गांधी की एंट्री कांग्रेस के लिए यूपी में गेमचेंजर साबित हो सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या वरुण गांधी वाकई कांग्रेस का दामन थामेंगे, और अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर बीजेपी और यूपी की सियासत पर कितना गहरा पड़ेगा। आने वाले दिन इस सवाल का जवाब देने वाले हैं।
