जोहार हिंदुस्तान | लोहरदगा/झारखंड: शहंशाहे लोहरदगा हजरत बाबा दुखन शाह रहमतुल्लाह अलैहे के 101वें चार दिवसीय सालाना उर्स का शुभारंभ पूरे अकीदत, एहतराम और धार्मिक गरिमा के साथ हो चुका है। उर्स के आगाज के मौके पर जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा हजरत बाबा दुखन शाह के मजारे पाक पर पारंपरिक रूप से चादरपोशी की गई।
उपायुक्त डॉ. कुमार ताराचंद एवं पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी के संयुक्त नेतृत्व में सदर थाना परिसर से बाजे-गाजे के साथ जुलूस निकाला गया, जो मजार शरीफ पहुंचा। इसके बाद उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक ने अंजुमन इस्लामिया के पदाधिकारियों के साथ मजार पर चादरपोशी कर उर्स का औपचारिक शुभारंभ किया।
चादरपोशी के उपरांत उपायुक्त डॉ. कुमार ताराचंद, पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी, अंजुमन इस्लामिया के सदर अब्दुल रउफ अंसारी, सेक्रेटरी शाहिद अहमद बेलू, नाजिम-ए-आला हाजी अब्दुल जब्बार, मोजम्मिल अंसारी, सैयद आरिफ हुसैन उर्फ बबलू सहित प्रशासनिक अधिकारियों, अंजुमन के ओहदेदारों एवं सदस्यों ने क्षेत्र में अमन-चैन, भाईचारा और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।
बाबा दुखन शाह रहमतुल्लाह अलैहे का उर्स हर वर्ष आपसी सौहार्द, धार्मिक सद्भाव और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। इस दरगाह पर सभी धर्मों और समुदायों के लोग आस्था के साथ पहुंचते हैं और मजार पर चादर चढ़ाकर अपने परिवार, समाज और देश की तरक्की के लिए दुआ करते हैं।
उर्स के दौरान कव्वाली, लंगर और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सालाना उर्स में लोहरदगा के अलावा रांची, गुमला, लातेहार, पलामू सहित उड़ीसा, बिहार, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे हैं। खासकर रात में आयोजित होने वाली कव्वाली महफिल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
मौके पर उपायुक्त डॉ. कुमार ताराचंद ने कहा कि उर्स मेला सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, शांति और सौहार्द का संदेश देते हैं। वहीं पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी ने कहा कि उर्स के दौरान विधि-व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण वातावरण में धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो सकें।
प्रशासन एवं अंजुमन इस्लामिया के संयुक्त प्रयास से उर्स को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। बाबा दुखन शाह का यह सालाना उर्स न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की एक खूबसूरत मिसाल भी प्रस्तुत करता है।
