जोहार हिंदुस्तान | पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन (इंडिया ब्लॉक) ने एकजुटता दिखाते हुए पटना में गुरुवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान महागठबंधन ने ऐलान किया कि आगामी चुनाव में तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। यह घोषणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने की। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग परिवर्तन चाहते हैं और इस बार महागठबंधन एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरेगा।
अशोक गहलोत ने दावा किया कि पिछले चुनाव में जनता ने महागठबंधन को व्यापक समर्थन दिया था, लेकिन मामूली मतांतर के कारण एनडीए सत्ता में आ गया। उन्होंने बीजेपी पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अब बीजेपी अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का नाम बताए।
कई डिप्टी सीएम बनाने की घोषणा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गहलोत ने वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम बनाए जाने का समर्थन किया और कहा कि महागठबंधन अन्य घटक दलों के नेताओं को भी उपमुख्यमंत्री पद देकर क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समन्वय को मजबूत करेगा।
इस मंच पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, भाकपा-माले के दीपांकर भट्टाचार्य, वीआईपी के मुकेश सहनी, कांग्रेस और अन्य दलों के प्रमुख नेता मौजूद रहे। महागठबंधन ने दावा किया कि यह चुनाव सामाजिक न्याय बनाम भाजपा की नीतियों के बीच निर्णायक लड़ाई होगी।
मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर उठे सवाल
बिहार में 18 प्रतिशत आबादी मुस्लिम समुदाय की है, जो चुनावी दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बावजूद महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुस्लिम समुदाय के लिए कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। न तो उपमुख्यमंत्री पद के लिए मुस्लिम चेहरा सामने रखा गया और न ही किसी बड़े मंत्रालय या नीति निर्माण में भागीदारी का संकेत दिया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब मुकेश सहनी जैसे क्षेत्रीय नेता को उपमुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की जा सकती है, तो मुस्लिम समुदाय को क्या मिलेगा? क्या उन्हें केवल अल्पसंख्यक आयोग, बोर्ड या निगमों में सीमित पद देकर संतुष्ट किया जाएगा? यह सवाल अब राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल
क्या 18% मुस्लिम वोट बैंक को महागठबंधन में सम्मानजनक भागीदारी मिलेगी?
क्या केवल घोषणाओं के सहारे मुसलमानों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की जाएगी?
या इस बार उन्हें सत्ता में वास्तविक और निर्णायक हिस्सेदारी दी जाएगी?
बिहार की राजनीति में यह मुद्दा अब चुनावी विमर्श का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।
