जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली: नोएडा में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR (Special Integrated Revision) अभियान का दबाव अब शिक्षकों पर भारी पड़ने लगा है। लगातार घर-घर सर्वे, फॉर्म भरने और ऐप अपडेट जैसे कामों से परेशान दो महिला टीचर, जो BLO ड्यूटी भी संभाल रही थीं, ने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
पहली टीचर ने अपने त्यागपत्र में लिखा
20 वर्षों से सेवा दे रही हूं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियाँ अत्यंत विषम हैं… इसलिए अध्यापन और BLO दोनों कार्यों से इस्तीफा दे रही हूं।
दूसरी टीचर पिंकी सिंह ने इससे पहले लिखा था
मैंने SIR के 215 फॉर्म फीड कर दिए हैं, अब मुझसे यह काम नहीं होगा। न पढ़ा पा रही हूं, न BLO का काम कर पा रही हूं।
इससे एक दिन पहले ही नोएडा में 60 BLO और 7 सुपरवाइजर पर FIR दर्ज की गई थी, जिसके बाद सिस्टम में डर और असंतोष दोनों बढ़ गए हैं।
नोएडा DM मेधा रूपम इस अभियान की निगरानी कर रही हैं, जो देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं।
शिक्षकों का कहना है कि “SIR अभियान इतना भारी पड़ रहा है कि शिक्षण कार्य लगभग ठप हो गया है।
SIR में क्या हो रहा है?
घर-घर जाकर वोटर वेरिफिकेशन
नए वोटर जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया
ऐप में रियल-टाइम डेटा फीडिंग
BLO से हर दिन टार्गेट पूरा करने का दबाव
भारी संख्या में फॉर्म भरने की बाध्यता
समय सीमा बेहद कम, कार्यभार दोगुना
इस्तीफा देने वाली टीचरों की मुख्य दलील
शिक्षण और BLO दोनों जिम्मेदारी निभाना असंभव
छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित
फॉर्म फीडिंग और सर्वे का अत्यधिक बोझ
मानसिक तनाव और शारीरिक थकावट
FIR और दंडात्मक कार्रवाई का डर
अब यह काम संभव नहीं”— टीचर की सीधी टिप्पणी
FIR के बाद क्यों बढ़ा तनाव?
नोएडा में 60 BLO और 7 सुपरवाइजर पर एक साथ FIR
आरोप: SIR प्रक्रिया में लापरवाही
BLOs में डर— “हम पढ़ाएं या FIR झेलें?”
परिवार और बच्चों को समय न दे पाने की शिकायत
सोशल मीडिया पर मामला तेजी से चर्चा में
