जोहार हिंदुस्तान | पटना : बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट लेती दिख रही है। विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर मचे घमासान ने गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए से नाराज चल रहे हैं और एक बार फिर राजद के साथ हाथ मिलाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
सीट बंटवारे पर फूटा विवाद
लंबे मंथन के बाद एनडीए में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय तो हो गया, लेकिन इससे असंतोष गहराता दिख रहा है।
इस बार बीजेपी और जेडीयू बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि पहले जेडीयू को हमेशा ‘बड़े भाई’ का दर्जा मिला था।
नीतीश इस बार 9 सीटों के बंटवारे से खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
इसी नाराजगी को देखते हुए सीएम हाउस में दोपहर 12 बजे जेडीयू की अहम बैठक बुलाई गई है।
राजद के साथ “बैकडोर” बातचीत के संकेत
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तेजस्वी यादव के करीबी और राज्यसभा सांसद संजय यादव आज सुबह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात करने पहुंचे थे।
वहीं, लालू यादव ने अपने कुछ प्रत्याशियों के सिंबल रोक दिए हैं, जिससे यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि “दरवाजे बंद नहीं हुए हैं”।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मारने की तैयारी में हैं?
लोजपा और एनडीए में बढ़ती दूरियां
जेडीयू और बीजेपी के बीच सीटों को लेकर जारी तनातनी के बीच, चिराग पासवान की लोजपा (रा.) भी खुलकर असंतोष जता रही है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि चिराग एनडीए से बाहर होते हैं, तो मुकेश सहनी की ‘विकासशील इंसान पार्टी’ गठबंधन में शामिल हो सकती है।
राजगीर और मोरवा सीट बना विवाद का केंद्र
सबसे बड़ा विवाद राजगीर सीट को लेकर है। यह जेडीयू की परंपरागत सीट मानी जाती है, लेकिन इसे लोजपा(रा.) को देने की बात सामने आई।
इस पर मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा राजगीर किसी भी हालत में जेडीयू के हाथ से नहीं जाएगी।
इसी तरह मोरवा और तारापुर सीटों को लेकर भी घमासान जारी है।
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तारापुर से उम्मीदवार होंगे और उनके नामांकन में योगी आदित्यनाथ और अन्य भाजपा नेता शामिल हो सकते हैं।
नीतीश की “पलटी” हिस्ट्री से सतर्क भाजपा
नीतीश कुमार की राजनीति में यू-टर्न कोई नई बात नहीं।
2013 में भाजपा से अलग,
2015 में राजद के साथ,
2017 में एनडीए में वापसी,
2022 में फिर महागठबंधन,
और 2024 में दोबारा एनडीए में लौटे।
भाजपा नेतृत्व जानता है कि अगर नीतीश को सीएम चेहरा नहीं रखा गया, तो वे कभी भी महागठबंधन की ओर रुख कर सकते हैं।
जेडीयू ने जारी किए अपने उम्मीदवार
सीएम ने कई सीटों पर अपने उम्मीदवारों को सिंबल देकर संदेश दे दिया है कि जेडीयू अपने फैसलों पर कायम रहेगी।
मोकामा से अनंत सिंह, दरभंगा से सुनील कुमार, सुपौल से बिजेंद्र प्रसाद यादव, और अन्य दिग्गजों के नामों की घोषणा हो चुकी है।
नीतीश अब भी “किंगमेकर”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश बिहार की राजनीति के “तुरुप के पत्ते” हैं।
उनका कोर वोट बैंक — कुर्मी (4%), कोइरी (6%) और EBC (27%) — अब भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
नीतीश की उम्र और सेहत को देखते हुए यह चुनाव उनकी आखिरी बड़ी सियासी पारी मानी जा रही है।
भाजपा समझती है कि जब तक नीतीश मजबूत हैं, जेडीयू और एनडीए का समीकरण कायम है।
बड़ा सवाल — क्या फिर पलटी मारेंगे नीतीश?
बिहार की राजनीति में जो समीकरण आज हैं, वो कल बदल सकते हैं।
अब सबकी निगाहें हैं सीएम हाउस की उस बैठक पर, जहाँ से नीतीश का अगला कदम तय होगा।
क्या वे एक बार फिर राजद के साथ जाएंगे,
या एनडीए में रहकर आखिरी दांव खेलेंगे?
बिहार की सियासत का जवाब जल्द ही मिल जाएगा।
