जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली: देश की राजधानी से एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। देश के बहुचर्चित उन्नाव रेप मामले में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दिए जाने के खिलाफ उन्नाव की रेप पीड़िता ने सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ मंगलवार देर रात इंडिया गेट पर धरना प्रदर्शन किया। हालांकि कुछ ही देर बाद दिल्ली पुलिस ने पीड़िता और योगिता भयाना को जबरन वहां से हटा दिया, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए यह राहत उसकी अपील लंबित रहने तक दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला अंतिम नहीं है, बल्कि अपील की सुनवाई पूरी होने तक के लिए है। कोर्ट ने सेंगर को 15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है।
हालांकि जमानत के साथ कई सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं। अदालत के निर्देशानुसार,
कुलदीप सिंह सेंगर पीड़िता के घर से 5 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश नहीं कर सकेंगा, उसे दिल्ली में ही रहना होगा, अपना पासपोर्ट संबंधित प्राधिकरण के पास जमा करना होगा और पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं कर सकेंगा। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कुलदीप सेंगर की तुरंत रिहाई भी संभव नहीं है, क्योंकि वो उन्नाव मामले से जुड़े अन्य केसों में भी सजा काट रहा हैं, जिनमें पीड़िता के पिता की संदिग्ध मौत से जुड़ा मामला भी शामिल है।
जमानत के आदेश से नाराज़ पीड़िता ने इसे “न्याय के साथ अन्याय” करार दिया है। पीड़िता का कहना है कि उसे पहले भी कई बार जान से मारने की कोशिश की जा चुकी है और उसके परिवार के सदस्य इस केस के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में सेंगर को जमानत मिलना उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
इसी आक्रोश के चलते पीड़िता सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गई, लेकिन देर रात दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को अनुमति न होने का हवाला देते हुए दोनों को वहां से हटा दिया। पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में महिला सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और प्रभावशाली आरोपियों को मिलने वाली राहत पर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
