जोहार हिंदुस्तान | लोहरदगा: जिला राजी पड़हा व्यवस्था लोहरदगा के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आज नगर परिषद सामुदायिक भवन, ब्लॉक परिसर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राजी पड़हा बेल लक्ष्मी नारायण भगत ने की। इस बैठक में संगठन की मजबूती, सदस्यों के हक-अधिकार की रक्षा तथा समुदाय के उत्थान को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए।
बैठक की शुरुआत पारंपरिक विधि से हुई, जिसके बाद विभिन्न एजेंडों पर चर्चा की गई। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि राजी पड़हा व्यवस्था सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों की संरक्षक व्यवस्था है। इसलिए इसे हर स्तर पर सशक्त और सक्रिय बनाना समय की मांग है।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय
🔹 राज्यपाल से मुलाकात कर हक-अधिकार रखना
पदाधिकारियों ने निर्णय लिया कि शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात करेगा और पारंपरिक राजी पड़हा व्यवस्था के संवैधानिक अधिकारों एवं मान्यता की मांग को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत करेगा।
🔹 पड़हा सेमिनार का आयोजन
समाज में जागरूकता फैलाने और युवाओं को संगठन से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रखंडों में पड़हा सेमिनार आयोजित किए जाएंगे।
🔹 संगठन को गांव-गांव स्तर तक मजबूत करने की रणनीति
प्रत्येक क्षेत्रीय पड़हा में नियमित बैठक आयोजित करने, स्थानीय समस्याओं को चिह्नित करने और सामुदायिक एकजुटता बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
बेल लक्ष्मी नारायण भगत ने कहा..
हमारा उद्देश्य संगठन को प्रत्येक स्तर पर मजबूत करना है। राजी पड़हा व्यवस्था आदिवासी समाज की आत्मा है। हमें अपने हक-अधिकार की रक्षा के लिए एकजुट रहना होगा और प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से सकारात्मक सहयोग लेते हुए आगे बढ़ना होगा।”
बैठक में सामाजिक और सांस्कृतिक सुदृढ़ीकरण पर भी चर्चा
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पारंपरिक संस्कृति, पर्व-त्योहार और सामाजिक रीति-रिवाजों को संरक्षित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। युवाओं को संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारी
बैठक में उप दीवान बजरंग उरांव, कोषाध्यक्ष गोसाई भगत, दीवान वीरेंद्र उरांव, उप दीवान बबलू उरांव, मंजन उरांव, जोख बेल अध्यक्ष अनमोल राजू बाखला, जोख दीवान सुखदेव उरांव, मीडिया प्रभारी सुरेंद्र उरांव सहित अन्य सम्मानित पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।
बैठक का समापन संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने, हक-अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के संकल्प के साथ किया गया। सभी पदाधिकारियों ने आगामी कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आश्वासन दिया। यह बैठक आदिवासी समुदाय की पारंपरिक न्याय प्रणाली और स्वशासन मॉडल को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
