जोहार हिंदुस्तान | उत्तराखंड: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में साल 2020 में लिए गए पतंजलि देसी गाय के घी के सैंपल की जांच रिपोर्ट और कानूनी कार्रवाई पर बड़ा अपडेट सामने आया है।
जिले की एक स्थानीय अदालत ने पाया कि पतंजलि का घी निर्धारित खाद्य मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके बाद अदालत ने कंपनी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
लेकिन फैसले के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं—क्या उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ी इतनी बड़ी धोखाधड़ी पर सिर्फ 1 लाख का जुर्माना पर्याप्त है?
क्या है पूरा मामला?
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में 2020 में लिए गए Patanjali Ayurved के देसी गाय घी के सैंपल की जांच की पुष्टि 2021 में राज्य व केंद्रीय दोनों लैबों ने की थी, जिसमें घी को “सब-स्टैंडर्ड / उपभोक्ता स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित” पाया गया।
इस मामले की सुनवाई लगभग पाँच साल चली और 27 नवंबर 2025 को पिथौरागढ़ की अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने फैसला सुनाया। अदालत ने पतंजलि पर 1,00,000 का जुर्माना लगाया, साथ ही घी वितरित करने वाले डिस्ट्रीब्यूटर और खुदरा विक्रेता पर 25,000 और 15,000 का जुर्माना लगाया गया है।
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए, और कंपनियों/विक्रेताओं को FSSAI एवं FSDA मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने सलाह दी है कि उपभोक्ताओं को प्रमाणित उत्पाद ही खरीदने चाहिए, क्योंकि अब खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और मिलावट की जांच पहले से अधिक हुई है।
दो राज्यों की लैब में फेल हुआ सैंपल
– पतंजलि देसी गाय घी का सैंपल 2020 में पिथौरागढ़ से लिया गया था।
– इसकी जांच उत्तराखंड की लैब और फिर उत्तर प्रदेश की केंद्रीय रेफरल लैब गाज़ियाबाद में हुई।
– दोनों जगह घी को सब-स्टैंडर्ड और फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड के खिलाफ पाया गया।
लैब रिपोर्ट में बताया गया कि घी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी।
फैसला आने में लगे पाँच साल
सैंपल जांच 2020, री-टेस्ट 2021 और सुनवाई में बार-बार देरी के बाद यह मामला 2025 तक चला।
और अब अदालत ने 27 नवंबर 2025 को अंतिम फैसला सुनाया है।
इस दौरान पतंजलि ब्रांड का घी देशभर में बड़े पैमाने पर बिकता रहा और लोग उसका सेवन करते रहे। इससे न केवल पतंजलि को करोड़ों का मुनाफा हुआ बल्कि करोड़ों लोगों के सेहत से खिलवाड़ भी किया गया।
पतंजलि, डिस्ट्रीब्यूटर और स्टोर—तीनों पर जुर्माना
कोर्ट ने सिर्फ कंपनी पर ही नहीं, बल्कि सप्लाई चैन में जुड़े सभी पक्षों पर जुर्माना लगाया है जिसमें निम्न पक्ष शामिल हैं।
Patanjali Ayurved Ltd — 1,00,000
डिस्ट्रीब्यूटर (Brahma Agency) — 25,000
रिटेलर (स्टोर मालिक) — 15,000
अदालत ने चेतावनी दी कि आगे मानकों का उल्लंघन मिला तो कड़ी कार्रवाई होगी।
उपभोक्ताओं के बीच बड़ा सवाल
फैसले के बाद उपभोक्ता संगठनों ने सवाल उठाए हैं कि जब सैंपल लैब में फेल मिला और केस पाँच साल चला तो जुर्माना इतना कम क्यों?
कई संगठनों का कहना है कि फूड सेफ्टी से जुड़े मामलों में जुर्माना और सख्ती दोनों बढ़ाई जानी चाहिए, क्योंकि यह सीधे लोगों की सेहत और सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
विभाग की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड FSDA ने कहा है कि यह मामला कंपनियों के लिए चेतावनी है कि गुणवत्ता में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
