जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली: आज देश स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती मना रहा है। भारत के इतिहास में नेहरू जी सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की आधारशिला रखने वाले दूरदर्शी विचारक, लेखक, वैज्ञानिक सोच के समर्थक और लोकतंत्र के सबसे मज़बूत स्तंभ माने जाते हैं।
भारत को आधुनिक राष्ट्र की दिशा देने वाले नेता
नेहरू का जीवन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, वैज्ञानिक तरक्की, शिक्षा, सामाजिक न्याय और वैश्विक कूटनीति के साथ गहराई से जुड़ा रहा।
स्वतंत्रता के बाद देश विभाजन, गरीबी, अशिक्षा और बिखरी आर्थिक स्थिति से जूझ रहा था—ऐसे कठिन दौर में नेहरू ने देश को एक आधुनिक, वैज्ञानिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में खड़ा करने की नींव रखी।
बनाई वे संस्थाएं, जिन पर आज भी टिका है भारत
भारत के विकास मॉडल की सबसे बड़ी ताकत उनके द्वारा स्थापित संस्थाएं हैं। जिनमें मुख्य रूप से
आईआईटी (IITs)
आईआईएम (IIMs)
DRDO, ISRO की नींव
भारी उद्योगों के लिए नेशनल प्लानिंग मॉडल
देश के पहले बड़े डैम व स्टील प्लांट
लोकतांत्रिक संस्थाओं का मज़बूत ढांचा
नेहरू जी का विश्वास था कि “भारत का भविष्य विज्ञान और तर्क पर आधारित होना चाहिए।”
आज भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और वैज्ञानिक शक्ति के रूप में जिस मुकाम पर है, उसकी जड़ें नेहरू द्वारा बनाए गए यही संस्थानों में हैं।
बच्चों के प्रिय ‘चाचा नेहरू’
नेहरू बच्चों के प्रति अपने प्यार के लिए विशेष रूप से याद किए जाते हैं। उनका मानना था कि “बच्चे देश का भविष्य हैं, और उनकी शिक्षा व संवर्धन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।”
इसी कारण देश में उनके जन्मदिन को बाल दिवस (Children’s Day) के रूप में मनाया जाता है।
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी के प्रबल समर्थक
नेहरू का सबसे बड़ा योगदान भारतीय लोकतंत्र को मजबूत नींव देना था।
दुनिया के कई देशों में स्वतंत्रता के बाद तानाशाही आ गई, लेकिन भारत में लोकतंत्र फल-फूल सका—क्योंकि नेहरू ने संस्थाओं को स्वतंत्र रखा, प्रेस की आज़ादी का सम्मान किया और विरोध की आवाजों को भी महत्व दिया।
नेहरू आज भी क्यों प्रासंगिक हैं?
2025 के भारत में नेहरू को लेकर बहसें जरूर होती हैं, लेकिन उनका योगदान निर्विवाद है। उन्होंने विज्ञान आधारित विकास का मार्ग खोला
भारत को गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व दिलाया, शिक्षा व तकनीक को विकास का मूल स्तंभ बनाया, विविधताओं के बीच एकता की नींव रखी
आज जब भारत तेज़ी से वैश्विक शक्ति बन रहा है तो इसमें नेहरू की दूरदर्शिता और भी प्रासंगिक दिखाई देती है।
एक सपना जो आज भी अधूरा है
नेहरू जी का सपना था कि एक ऐसा भारत जहाँ गरीबी न हो, भेदभाव न हो और हर नागरिक को समान अवसर मिले।”
भारत ने लंबा सफर तय किया है, लेकिन यह सपना अब भी अधूरा है। नेहरू की जयंती हमें यह याद दिलाती है कि विकास तभी सार्थक है जब वह अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
नेहरू को बदनाम कर कई लोग हुए मशहूर!
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली नेताओं में रहे। लेकिन सच यह भी है कि नेहरू पर लगातार हमले करने और उन्हें बदनाम करने की कोशिशों ने कई लोगों को अचानक सुर्खियों में पहुंचा दिया।
राजनीति हो या सोशल मीडिया—नेहरू की आलोचना तेज़ी से “ट्रेंड” बन जाती है और कुछ लोग इसी के दम पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो जाते हैं।
क्यों होते हैं नेहरू टारगेट?
देश की हर ऐतिहासिक घटना में उनकी केंद्रीय भूमिका, लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण राजनीतिक विरोध, सोशल मीडिया पर आधे-अधूरे तथ्यों का प्रचार, इतिहास के जटिल मुद्दों को सरल आरोपों में बदलकर पेश करना
नेहरू की छवि पर हमला लेकिन…
नेहरू के खिलाफ बोलकर लोकप्रियता पाने की कोशिश करने वालों को शायद यह पता नहीं कि इतिहास सिर्फ आरोपों से नहीं, कामों और उपलब्धियों से लिखा जाता है।
और नेहरू के योगदान इतने विशाल हैं कि समय-समय पर उठाए गए आरोप भी उनकी विश्वसनीयता को हिला नहीं पाए।
