जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान नवनियुक्त आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब हटाने की घटना अब एक बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप ले चुकी है। यह मामला अब केवल राजनीतिक आलोचना तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी कार्रवाई, एफआईआर, महिला सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे गंभीर सवालों के केंद्र में आ गया है।
बेंगलुरु में जीरो FIR की मांग, गंभीर आरोप
इस प्रकरण को लेकर बेंगलुरु के वकील ओवैज हुसैन एस ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज करने और वैधानिक कार्रवाई की मांग करते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में मुख्यमंत्री पर निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
बिना सहमति महिला के साथ शारीरिक हस्तक्षेप
यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आने वाला कृत्य
महिला की मर्यादा भंग
सार्वजनिक मंच पर अपमान
धार्मिक आस्था और गरिमा का उल्लंघन
शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 की भावना के विरुद्ध है और एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में अस्वीकार्य है।
लखनऊ में FIR, सुमैया राणा का बड़ा बयान
इस विवाद ने अब उत्तर प्रदेश में भी कानूनी रूप ले लिया है।
मशहूर शायर मुनव्वर राणा की बेटी सुमैया राणा ने लखनऊ के केसरबाग़ पुलिस स्टेशन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
सुमैया राणा ने कहा यह घटना सिर्फ एक महिला के साथ बदसलूकी नहीं है, बल्कि यह एक खतरनाक मिसाल कायम करती है। अगर सत्ता में बैठे लोग सार्वजनिक रूप से किसी महिला की धार्मिक पहचान से छेड़छाड़ करेंगे, तो समाज को गलत संदेश जाएगा।
नुसरत परवीन ने छोड़ा बिहार, नौकरी जॉइन करने से इनकार
नुसरत परवीन के साथ 15 दिसंबर 2025 को पटना में आयोजित एक सरकारी नियुक्ति कार्यक्रम के दौरान हुई अमानवीय व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही देशभर में नाराज़गी फैल गई।
घटना के अगले ही दिन डॉ. नुसरत परवीन बिहार छोड़कर कोलकाता अपने परिवार के पास चली गईं। उन्होंने फिलहाल बिहार सरकार की नौकरी जॉइन न करने का निर्णय लिया है। परिवार उन्हें समझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन नुसरत फिलहाल बिहार लौटने की मानसिक स्थिति में नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
इस मामले की गूंज देश की सीमाओं से बाहर भी सुनाई दी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों और मानवाधिकार संगठनों ने इसे महिला अधिकारों का उल्लंघन, धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला, सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है। कई विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में इसे भारत में अल्पसंख्यक महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया गया है।
बढ़ता दबाव, बढ़ती मुश्किलें
इस पूरे घटनाक्रम के बाद महिला संगठनों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है RJD और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी और इस्तीफे की मांग तेज कर दी है
