जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली: बीते पांच वर्षों में भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2024 के बीच कुल 8,96,843 लोगों ने भारत की नागरिकता त्याग दी है। यह संख्या करीब 9 लाख के आसपास पहुंच चुकी है।
यह जानकारी केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। प्रस्तुत आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि साल 2022 के बाद नागरिकता छोड़ने की रफ्तार में अचानक तेज़ी आई है।
आंकड़ों में क्या कहते हैं तथ्य
सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार
2019 से 2021 के बीच नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन 2022, 2023 और 2024 में यह संख्या तेजी से बढ़ी
कुल मिलाकर पिछले पांच वर्षों में लगभग 9 लाख लोग भारतीय नागरिकता छोड़ चुके हैं
क्यों बढ़ रही है नागरिकता छोड़ने की प्रवृत्ति?
हालांकि सरकार ने नागरिकता छोड़ने के कारणों का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर रोजगार और शिक्षा के अवसर
विदेशों में स्थायी निवास (PR) और नागरिकता की सुविधाएं आर्थिक, सामाजिक और पेशेवर कारण, इन वजहों से लोग विदेशों में बसने का विकल्प चुन रहे हैं।
चिंता का विषय
विशेषज्ञों के अनुसार, तेजी से बढ़ती नागरिकता त्यागने की प्रवृत्ति देश के लिए एक गंभीर संकेत है। खासकर जब यह संख्या पढ़े-लिखे, पेशेवर और उच्च आय वर्ग से जुड़ी हो।
संसद में पेश किए गए ये आंकड़े अब इस मुद्दे पर नीतिगत बहस और आत्ममंथन की जरूरत को रेखांकित कर रहे हैं।
