जोहार हिंदुस्तान | हैदराबाद: हैदराबाद विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय उर्दू सेमिनार के अवसर पर हाजी अफसर कुरैशी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया कुरैश कॉन्फ्रेंस को शिक्षा एवं सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
यह सेमिनार उर्दू भाषा और साहित्य के विकास, तथा शिक्षा में सामाजिक संगठनों की भूमिका पर केंद्रित था। कार्यक्रम में देश-विदेश से कई प्रतिष्ठित विद्वान, शिक्षाविद और साहित्यकारों ने भाग लिया।
सेमिनार में मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
प्रो. रहमत यूसुफ़ज़ई (पूर्व अध्यक्ष, उर्दू विभाग, हैदराबाद यूनिवर्सिटी),
डॉ. एम. ग़ज़ाली (सेमिनार कोऑर्डिनेटर, AIAS),
प्रो. अरशिया जबीं (सेमिनार कोऑर्डिनेटर, HCU),
डॉ. सिराज अज़ीम (चेयरमैन, सेमिनार आयोजन समिति),
डॉ. शोएब रज़ा खान (सह-समन्वयक, AIAS),
डॉ. मोहम्मद क़ासिफ़ (सह-समन्वयक, HCU),
डॉ. देवेश निगम (रजिस्ट्रार, यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद),
सुश्री नुसरत मेहदी (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, भोपाल),
फहीम अख्तर (पत्रकार, शायर एवं अफसाना निगार, लंदन),
आसिफ़ आज़मी (चेयरमैन, PEN फ़ाउंडेशन),
डॉ. ओधेश रानी बावा (पत्रकार एवं शोधकर्ता, हैदराबाद),
डॉ. फ़ाज़िल हुसैन परवेज़ (संपादक, गवाह एवं चेयरमैन, मीडिया प्लस, हैदराबाद),
प्रो. नसीमुद्दीन फारीस (पूर्व डीन एवं अध्यक्ष, उर्दू विभाग, MANUU),
प्रो. सत्तार साहिर (पूर्व अध्यक्ष, उर्दू विभाग, एस.वी. यूनिवर्सिटी, तिरुपति),
डॉ. नईमा जाफ़री पशा (उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया अदब-ए-अतफ़ाल सोसायटी, नई दिल्ली),
मुज़फ्फर हुसैन नय्याब (शायर एवं विशेषज्ञ, दोहा, क़तर),
अधिवक्ता सनौबर अली कुरैशी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया कुरैश कॉन्फ्रेंस, नई दिल्ली),
शारिक नक़्शबंदी (प्रधान संपादक, एशिया एक्सप्रेस, औरंगाबाद),
अधिवक्ता खलील-उर-रहमान (वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली),
प्रो. फ़ज़लुल्लाह मुकर्रम (अध्यक्ष, उर्दू विभाग, हैदराबाद यूनिवर्सिटी),
तथा मोहम्मद नबी कुरैशी (कर्नाटक राज्य अध्यक्ष, ऑल इंडिया कुरैश कॉन्फ्रेंस)।
सेमिनार के दौरान वक्ताओं ने उर्दू भाषा, साहित्य और शिक्षा के विकास में सामाजिक संस्थाओं के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि “उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एकता और गंगा-जमुनी तहज़ीब की प्रतीक है।
कार्यक्रम के अंत में हाजी अफसर कुरैशी को समाजसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान के लिए स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
