जोहार हिंदुस्तान | चंदवा/लातेहार: सांसद आदर्श ग्राम अठुला–चटुआग के किसानों द्वारा बिजली व्यवस्था सुधार को लेकर चल रहा जमीन समाधि सत्याग्रह आंदोलन बुधवार को चौथे दिन समाप्त हुआ। आंदोलन तब वापस लिया गया जब बिजली विभाग के एसडीओ बिरसा उरांव ने आंदोलनकारी किसानों को एक सप्ताह के भीतर पोल, खुटा, तार और ट्रांसफॉर्मर लगाने का आश्वासन दिया।
ऐसे हुआ विवाद का समाधान
आंदोलन स्थल पर एसडीओ बिरसा उरांव, विद्युतकर्मी मो. अली, ठेकेदार अशोक यादव और पंकज कुमार पहुंचे और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत समिति सदस्य अयुब खान, मुखिया नरेश भगत, तथा किसानों जीदन टोपनो, सनीका मुंडा, रामबृछ गंझु, ललुआ गंझु, बिजेंद्र गंझु आदि से विस्तृत बातचीत की।
एसडीओ ने कहा कि एक सप्ताह में पुराने लकड़ी के खुटे गिरा दिए जाएंगे। नए पोल, तार लगेंगे और जहाँ जरूरत होगी वहां ट्रांसफॉर्मर लगाया जाएगा।
इसके बाद किसानों ने जमीन समाधि सत्याग्रह आंदोलन वापस ले लिया। इसके साथ ही कार्यपालक अभियंता राजदेव मेहता और आंदोलनकारी प्रतिनिधि अयुब खान के बीच फोन पर बात हुई। कार्यपालक अभियंता ने भी शीघ्र कार्य शुरू करने का भरोसा दिया।
किसान वर्षों से बांस–बल्ली के सहारे बिजली चला रहे थे
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आजादी के बाद भी कई टोलों में पोल व तार कभी नहीं लगाए गए।
इस कारण किसान लंबे समय से बांस, लकड़ी के खुटे और पेड़ के सहारे बिजली के तार खींचकर किसी तरह घरों में बिजली जला रहे थे।
बारिश में बांस व लकड़ी सड़कर गिर जाते थे
कई बार तार गिरने से गाय, बकरी और ग्रामीणों की जान पर संकट आया, हर साल किसानों को खुद बांस–बल्ली बदलनी पड़ती थी
अयुब खान ने कहा कि यह गांव आजादी के इतने वर्षों बाद भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रहा। इस बार आश्वासन मिला है, लेकिन समय पर काम नहीं हुआ तो 15 दिन बाद फिर आंदोलन होगा।
किसानों ने सौंपा ज्ञापन
विद्युत कार्यपालक अभियंता, लातेहार को सौंपे गए ज्ञापन में इन अठुला, कारी टोंगरी, उबका पानी, पहना पानी, परहैया टोला, लोहराही, पोक्या, चोरझरिया, पुरंपपनिया, भेलवाही, बगडेगवा, चरकापत्थल एवं अन्य टोल टोलों में पोल, तार और ट्रांसफार्मर लगाने की मांग की गई।
साथ ही भुसाढ़ के भंडारगढ़ा स्थित बांड़ी सीमर टोला में विद्युतिकरण कराने की भी मांग की गई।
मौके पर मौजूद प्रमुख लोग अयुब खान (पंसस), नरेश भगत (मुखिया), मो. अली (बिजली विभाग), अशोक यादव व पंकज कुमार (मोईजी कंपनी), फगुनी भेंगरा, बीनीता कोंगाड़ी, फुलो भेंगरा, सीमा केरकेट्टा, उर्मिला भेंगरा, जीदन टोपनो, रामबृछ गंझु, ललुआ गंझु, मुना मुंडा, बुधराम बारला, बिजेंद्र गंझु, गोबिंद गंझु, नेमा परहैया, दिलवा गंझु, अमीत भेंगरा, अभिराम बारला, छोटे, लाल भेंगरा, जागो गंझु, पलिंजर गंझु सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।
