जोहार हिंदुस्तान | रांची/झारखंड: झारखंड के गोड्डा जिले में मॉब लिंचिंग का शिकार बने पप्पू अंसारी के मामले में Association for Protection of Civil Rights (APCR) की झारखंड प्रदेश इकाई ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। यह मुलाकात APCR के झारखंड प्रदेश सचिव एडवोकेट जियाउल्लाह के नेतृत्व में की गई, जहां संगठन की टीम ने मृतक के परिजनों को हर संभव कानूनी मदद देने का आश्वासन दिया।
पप्पू अंसारी के परिवार से मुलाकात के मामले को लेकर JOHAR HINDUSTAN से हुई बातचीत में APCR के प्रदेश सचिव एडवोकेट जियाउल्लाह ने कहा कि झारखंड में लगातार मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं, इसके बावजूद राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे को लेकर न तो संवेदनशील दिख रही है और न ही मॉब लिंचिंग के खिलाफ कोई सख्त कानून लाने को तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है वर्तमान सरकार मॉब लिंचिंग रोकने में विफल है।
उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग में मारे गए पप्पू अंसारी अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी चार छोटी बच्चियां हैं और घटना के बाद परिवार पूरी तरह से आर्थिक संकट में आ गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पप्पू अंसारी की पत्नी को तत्काल सरकारी नौकरी दी जाए और बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण एवं भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि इतनी गंभीर मॉब लिंचिंग की घटना के बावजूद अब तक केवल दो आरोपियों की ही गिरफ्तारी हो पाई है, जबकि घटना में शामिल अन्य आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि मामले की गंभीरता को समझते हुए सभी दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की जाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।
APCR ने स्पष्ट किया कि संगठन इस मामले को केवल कानूनी लड़ाई तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि मानवाधिकार और नागरिक अधिकारों के दृष्टिकोण से भी मामले की लगातार निगरानी करेगा। इस दौरान APCR के गोड्डा जिला कन्वीनर मोहम्मद सुफियान भी मौजूद थे। उन्होंने भी पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए संगठन की ओर से हर स्तर पर सहयोग का भरोसा दिलाया।
इसके बाद एडवोकेट जियाउल्लाह ने गोड्डा के अधिवक्ता मोहम्मद इनाम से भी मुलाकात की। इस बैठक में मामले की कानूनी स्थिति, प्राथमिकी, गिरफ्तारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन ने कहा कि कानून के तहत दोषियों को सजा दिलाने के लिए वे मामले की निगरानी करते रहेंगे।
गौरतलब है कि पप्पू अंसारी की मॉब लिंचिंग की घटना ने एक बार फिर झारखंड में कानून-व्यवस्था, भीड़ हिंसा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।