जोहार हिंदुस्तान | डेस्क/नई दिल्ली: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस को लेकर आंदोलन लगातार जारी है। इस मामले में निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर ही असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देकर सरकार और संगठन की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं।
BJP युवा मोर्चा जिला मंत्री अंकित बहुखंडी का इस्तीफा
ऋषिकेश से BJP युवा मोर्चा के जिला मंत्री अंकित बहुखंडी ने अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भेजे पत्र में लिखा—
“जिस तरह इस केस में VIP लोगों के नाम सामने आ रहे हैं और मेरी ही पार्टी के लोग मूकदर्शक बने हुए हैं, उसे देखकर मुझे शर्म आ रही है कि मैं किस दल से जुड़ा हूं।”
अंकित बहुखंडी ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिलता और CBI जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

BJP महिला मोर्चा की कार्यकर्ता आर्टी गौर का इस्तीफा
इससे पहले BJP महिला मोर्चा की कार्यकर्ता आर्टी गौर ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि एक बेटी को न्याय नहीं मिल पा रहा और पार्टी इस मुद्दे पर चुप है, यह बेहद दुखद है।
उन्होंने भी सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच और सीबीआई जांच की मांग की।
वरिष्ठ BJP नेता भगत राम कोठारी ने भी छोड़ी पार्टी
मामले को लेकर BJP के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्य मंत्री भगत राम कोठारी ने भी 1 जनवरी 2026 को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी केस ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया है। मैं ऐसी पार्टी में नहीं रह सकता जहां न्याय की लड़ाई में चुप्पी साध ली जाए। उनका इस्तीफा BJP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
क्या है अंकिता भंडारी मर्डर केस?
अंकिता भंडारी, ऋषिकेश के पास स्थित एक निजी रिसॉर्ट में काम करती थीं। साल 2022 में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य समेत तीन लोगों को आरोपी बनाया गया। केस में VIP दबाव, सबूत मिटाने और जांच को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप लगातार लगते रहे हैं।
हालांकि सरकार ने SIT जांच कराई, लेकिन पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है। जांच पूरी तरह निष्पक्ष नहीं है इसलिए CBI जांच जरूरी है।
बढ़ता जनआक्रोश और राजनीतिक दबाव
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए राज्यभर में समय-समय पर प्रदर्शन होते रहे हैं। अब BJP के भीतर से हो रहे इस्तीफों ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है। विपक्षी दल पहले से ही मुख्यमंत्री से इस्तीफे और CBI जांच की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आने वाले समय में सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है। क्योंकि अंकिता भंडारी मर्डर केस अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि न्याय बनाम सत्ता की लड़ाई बन चुका है। BJP के भीतर हो रहे लगातार इस्तीफे यह संकेत दे रहे हैं कि पार्टी के अंदर भी असंतोष गहराता जा रहा है।
