जोहार हिंदुस्तान | लोहरदगा: जिले के हेसल कारी टोली में झारखंड आंदोलनकारी मिलन समारोह सह फुटबॉल टूर्नामेंट का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य झारखंड आंदोलन के शहीदों और आंदोलनकारियों के संघर्ष को याद करते हुए युवाओं में एकता और खेल भावना को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय युवा कांग्रेस नेता अभिनव सिद्धार्थ शामिल हुए। उन्होंने झारखंड आंदोलनकारियों को राज्य निर्माण के सच्चे नायक बताते हुए कहा कि आज के युवाओं को उनके संघर्ष से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सभी अतिथियों का स्वागत आदिवासी परंपरा के अनुसार गमछा ओढ़ाकर किया गया।
इस मौके पर झारखंड आंदोलनकारी लीलकु उरांव, शिव सहाय उरांव, देवानंद उरांव, रुस्तम अंसारी, घनश्याम भगत, बिरवा उरांव सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में सरजीत सिंह को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे किसी कारणवश उपस्थित नहीं हो सके।
टूर्नामेंट के परिणाम
इस फुटबॉल टूर्नामेंट में कुल 56 टीमों ने भाग लिया।
अंडर-16 वर्ग में यंग वारियर टीम विजेता रही।
अंडर-17 से 40 वर्ग में लकड़ा ब्रदर्स चिरी ने खिताब जीता, जबकि उपविजेता देवांश क्लब कोको, रांची रही।
अंडर-40 प्लस वर्ग में ओल्ड आर्यन क्लब मैंना बगीचा लोहरदगा विजेता बना और चांपी पीकेट के जवान उपविजेता रहे।
विजेता टीमों को गांव की परंपरा के अनुसार “कला खांसी” देकर सम्मानित किया गया। कुल 14 टीमों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
मुख्य अतिथि का संबोधन
बुधवार शाम 7 बजे आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि अभिनव सिद्धार्थ ने सभी विजेताओं को बधाई दी और कहा झारखंड आंदोलनकारियों के नाम पर आयोजित यह टूर्नामेंट खेल के साथ-साथ एकता, संस्कृति और संघर्ष की भावना को भी जीवित रखता है। यह परंपरा झारखंड की आत्मा का प्रतीक है।
उन्होंने आयोजकों को इस प्रेरक आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया और युवाओं से समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
कार्यक्रम की सफलता के पीछे
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कई लोगों का सराहनीय योगदान रहा मुख्य संरक्षक बुद्धिमान उरांव, उद्घाटनकर्ता सुनील भगत, आयोजन समिति के अध्यक्ष रतनलाल उरांव, सचिव विकास उरांव और कोषाध्यक्ष जगदीप ने आयोजन की बागडोर संभाली।
संस्कृति, खेल और संघर्ष का संगम
हेसल कारी टोली का यह आयोजन सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान और एकजुटता का प्रतीक बन गया।
आंदोलनकारियों की विरासत और युवाओं के उत्साह ने मिलकर यह संदेश दिया कि संघर्ष की विरासत और खेल की भावना मिलकर ही झारखंड को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
