जोहार हिंदुस्तान | अजमेर/राजस्थान: शहंशाह-ए-हिंद हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (रह.) के 814वें सालाना उर्स के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को अजमेर शरीफ दरगाह में चादरपोशी की गई। प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू अजमेर पहुंचे और दरगाह में चादर चढ़ाकर देशवासियों की ओर से अमन, शांति और खुशहाली की दुआ की।
यह चादरपोशी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि देश की साझा सांस्कृतिक विरासत और गंगा–जमुनी तहज़ीब की मजबूत मिसाल मानी जाती है। गौरतलब है कि भारत की आज़ादी के बाद से ही प्रत्येक वर्ष उर्स के मौके पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से अजमेर शरीफ दरगाह में चादर पेश करने की परंपरा चली आ रही है। इस परंपरा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने पूरे कार्यकाल के दौरान लगातार निभाया है और हर वर्ष उनकी ओर से ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की बारगाह में चादर भेजी जाती रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि अजमेर शरीफ की दरगाह प्रेम, करुणा, सेवा और इंसानियत का प्रतीक है। ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ (रह.) की शिक्षाएं — “सबके लिए मोहब्बत, किसी से नफरत नहीं” — आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हैं। प्रधानमंत्री ने दुआ की कि भारत हमेशा एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के रास्ते पर आगे बढ़ता रहे।इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि अजमेर शरीफ़ की दरगाह सदियों से प्रेम, करुणा और भाईचारे का प्रतीक रही है। ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ (रह.) की शिक्षाएं आज भी समाज को इंसानियत, सौहार्द और सेवा के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (रह.) का संदेश— प्रेम और सेवा— भारत की साझी सांस्कृतिक विरासत की आत्मा है। उर्स के इस पावन अवसर पर मैं देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और आपसी भाईचारे की कामना करता हूं।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चादर पेश करने के बाद कहा कि अजमेर शरीफ़ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का केंद्र है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग आस्था के साथ आते हैं।
उर्स के मौके पर अजमेर शरीफ में देश–विदेश से लाखों जायरीन पहुंच रहे हैं। दरगाह परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। सूफी परंपरा से जुड़े इस ऐतिहासिक आयोजन को धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।
ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (रह.) की दरगाह सदियों से सभी धर्मों, वर्गों और समुदायों के लोगों को एक साथ जोड़ने का कार्य करती रही है, और प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से हर साल होने वाली चादरपोशी इसी साझा विरासत की निरंतरता का प्रतीक मानी जाती है।
इस अवसर पर कई केंद्रीय मंत्री, राजस्थान सरकार के मंत्री सहित राज्यस्तरीय प्रशासनिक अधिकारी, धार्मिक व सामाजिक संगठन के निम्नलिखित प्रतिनिधि मौजूद रहे। भागीरथ चौधरी, मंत्री, भारत सरकार, सुरेश रावत, मंत्री, राजस्थान सरकार, डॉ. चंद्र शेखर कुमार, सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार, लोक बंधु, आईएएस, जिला कलेक्टर, अजमेर, वंदिता राणा, आईपीएस, पुलिस अधीक्षक, अजमेर, अलहाज सैयद गुलाम किबरिया, अध्यक्ष, अंजुमन सैयदज़ादगान, अज़ीम चिश्ती, अध्यक्ष, अंजुमन शेखज़ादगान, मोहम्मद हुसैन खान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा, अनिस अब्बासी, अध्यक्ष, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा, दिल्ली प्रदेश, डॉ. असलम खान, राष्ट्रीय सूफी संवाद प्रभारी, रमेश सोनी, जिलाध्यक्ष, भाजपा, अजमेर आदि शामिल थे।
