जोहार हिंदुस्तान | लोहरदगा: झारखंड के सबसे पुराने नगर परिषदों में शामिल लोहरदगा नगर पालिका का ऐतिहासिक कार्यालय भवन आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। अंग्रेजों के शासनकाल में बना यह भवन वर्तमान समय में खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। हालत यह है कि इस ऐतिहासिक परिसर में नगर परिषद के उपयोग में आने वाले कचरा उठाव वाहनों के साथ-साथ पुराने सामान और कबाड़ी सामग्री रखी जा रही है, जिससे इस भवन का ऐतिहासिक गौरव धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है।
इस मुद्दे को जोहार हिंदुस्तान के डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से उठाए जाने के बाद अब यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लोहरदगा नगर परिषद अध्यक्ष पद के कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार संतोष उरांव ने इस खबर पर संज्ञान लेते हुए इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की घोषणा की है।
संतोष उरांव ने कहा है कि अगर नगर परिषद क्षेत्र की जनता उन्हें जीताकर नगर अध्यक्ष बनाती है तो वह इस ऐतिहासिक भवन का जीर्णोद्धार कराएंगे और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि यह भवन लोहरदगा की ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है और इसे संरक्षित करना नगर परिषद और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
बताया जाता है कि लोहरदगा नगर पालिका की स्थापना अंग्रेजों के शासनकाल में 2 जुलाई 1888 को हुई थी। इसी कारण लोहरदगा नगर परिषद को राज्य के सबसे पुराने नगर परिषदों में शामिल माना जाता है। ऐतिहासिक महत्व वाले इस भवन से वर्ष 2014 में नगर पालिका कार्यालय को स्थानांतरित कर दिया गया था। उस समय तत्कालीन अध्यक्ष पावन एक्का के कार्यकाल में कार्यालय को मेनका सिनेमा हॉल के पास स्थित दूसरे भवन में शिफ्ट किया गया था।
कार्यालय स्थानांतरित होने के बाद से यह ऐतिहासिक भवन उपेक्षा का शिकार हो गया। धीरे-धीरे इसका उपयोग कचरा वाहन खड़ा करने, पुराने सरकारी सामान रखने और कबाड़ी सामग्री जमा करने के स्थान के रूप में होने लगा। इससे भवन की संरचना और पहचान दोनों को नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन लोहरदगा की ऐतिहासिक धरोहर है और इसे बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं अब कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार संतोष उरांव द्वारा इसे चुनावी प्राथमिकता में शामिल करने और जीत के बाद तत्काल जीर्णोद्धार कराने के ऐलान के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि झारखंड के सबसे पुराने नगर परिषद के इस ऐतिहासिक कार्यालय का गौरव एक बार फिर वापस लौट सकता है।
नगर परिषद चुनाव के बीच यह मुद्दा अब विकास और विरासत संरक्षण दोनों से जुड़ा बड़ा चुनावी विषय बनता नजर आ रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस मुद्दे को कितना महत्व देती है और चुनाव परिणाम किस दिशा में जाता है।