जोहार हिंदुस्तान | संपादकीय/नई दिल्ली: झारखंड कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यालय को झारखंड के पांच कांग्रेस नेताओं को लेकर एक गुमनाम पत्र प्राप्त हुआ है, पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि झारखंड में कांग्रेस के कुछ नेता लंबे समय से निजी स्वार्थ के लिए पार्टी संगठन को कमजोर करने का काम कर रहे हैं।
पत्र में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह गतिविधियां हालिया समय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वर्षों से सुनियोजित तरीके से संगठन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आरोप है कि संगठन विरोधी कार्य करने वाले लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि पार्टी के लिए निष्ठापूर्वक काम करने वाले आम कार्यकर्ताओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे जमीनी स्तर पर कांग्रेस संगठन कमजोर हुआ है और नए कार्यकर्ता पार्टी से नहीं जुड़ पा रहे हैं।
गुमनाम पत्र भेजने वालों ने खुद को कांग्रेस का साधारण कार्यकर्ता बताया है। पत्र में यह भी लिखा गया है कि उन्हें किसी पद, लाभ या राजनीतिक महत्वाकांक्षा की कोई लालसा नहीं है। उनका दावा है कि वे केवल कार्यकर्ता हैं और कार्यकर्ता के रूप में ही अंतिम सांस तक पार्टी संगठन के लिए कार्य करते रहेंगे। पत्र में यह बात विशेष रूप से रेखांकित की गई है कि गठबंधन की सरकार में शामिल होने के बावजूद झारखंड में कांग्रेस का संगठन मजबूत होने के बजाय लगातार कमजोर होता जा रहा है।
पत्र के अनुसार कई जिलों और प्रखंडों में लंबे समय से संगठनात्मक बैठकें नहीं हो रही हैं। पार्टी कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी घटती जा रही है, जिससे जमीनी नेटवर्क प्रभावित हुआ है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठनात्मक शिथिलता का सीधा असर आने वाले चुनावों और राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है।
गुमनाम पत्र में यह भी दावा किया गया है कि इन मुद्दों की जानकारी पहले प्रदेश नेतृत्व तक भी पहुंचाई गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई या संज्ञान नहीं लिया गया। इससे कार्यकर्ताओं के बीच निराशा और असंतोष और गहराता जा रहा है। पत्र में यह संकेत भी दिया गया है कि यही वजह है कि झारखंड कांग्रेस लगातार अंदरूनी कलह से जूझ रही है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस पत्र को गंभीरता से लिया है। पार्टी स्तर पर इस मामले को लेकर आंतरिक चर्चा शुरू हो गई है और संगठनात्मक समीक्षा, रिपोर्ट तलब करने या तथ्यात्मक जांच जैसे कदमों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राष्ट्रीय कार्यालय को गुमनाम पत्र मिलने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि पत्र में जिन पांच नेताओं का उल्लेख किया गया है, वे कौन हैं, किस जिले से ताल्लुक रखते हैं और पार्टी संगठन में किस भूमिका में हैं। वहीं, विपक्षी दल भी कांग्रेस की इस अंदरूनी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और राजनीतिक लाभ की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम झारखंड कांग्रेस के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस पत्र के बाद क्या कदम उठाता है और क्या संगठनात्मक स्तर पर कोई बड़ा फैसला सामने आता है।
नोट : गुमनाम पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि JOHAR HINDUSTAN नहीं करता है।