लोहरदगा में हजरत बाबा दुखन शाह (रअ) के 101वें उर्स मुबारक के अवसर पर किरअत एवं नात-ए-पाक का भव्य इनामी मुकाबला आयोजित किया गया। यह आयोजन अंजुमन इस्लामिया लोहरदगा की देखरेख में, जमा मस्जिद कमिटी एवं मदरसा हजरत बाबा दुखन शाह के तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की सदारत हजरत मौलाना कारी शमीम आलम रज़वी ने की।
इनामी मुकाबले में रांची, लातेहार और लोहरदगा जिले के विभिन्न मदारिसों से आए छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान किरअत और नात-ए-पाक की शानदार प्रस्तुतियों ने मौजूद लोगों को खूब प्रभावित किया और पूरा माहौल रूहानियत से सराबोर हो गया।
किरअत के मुकाबले में पहला इनाम अबूजैद अंसारी, कौनैन एकेडमी राहत नगर लोहरदगा को प्रदान किया गया। दूसरा इनाम मो. शहजाद अली, मदरसा बाबा दुखन शाह लोहरदगा को तथा तीसरा इनाम शाहनवाज, मदरसा दारुल उलूम मरकजुल हेदाया को मिला। वहीं नात-ए-पाक प्रतियोगिता में पहला इनाम मो. तनवीर रजा, मदरसा बाबा दुखन शाह लोहरदगा ने हासिल किया। दूसरा इनाम अफरोज अंसारी, मदरसा अहले सुन्नत किस्को को तथा तीसरा इनाम हसनैन रजा, मदरसा कादिरया कंजुल ईमान नरकोपी रांची को दिया गया।
किरअत मुकाबले के निर्णायक मंडल में कारी तेजम्मुल हुसैन अमजदी और कारी गुलाम सैयदुल वरा शामिल रहे, जबकि नात-ए-पाक प्रतियोगिता के जज के रूप में मुफ्ती जीशान रजा सकाफी एवं हाफिज आलम रजा हशमती ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस इनामी मुकाबला कार्यक्रम को सफल बनाने में जमा मस्जिद कमिटी के सचिव सरवर आलम पाले, अंजुमन इस्लामिया के सदर अब्दुल रउफ अंसारी, सिक्रेट्री सैयद शाहिद अहमद (बेलू), नाजिमे आला हाजी अब्दुल जब्बार, नायब सदर सैयद आरिफ हुसैन बबलू, सह सचिव अनवर अंसारी, अल्ताफ कुरैशी, सेराज अंसारी, यासिन कुरैशी, अबुल कलाम तैगी, असगर तैगी, मो. शगीर, मो. लुकमान, मो. असगर, हाफिज शफिक, सरवर खान, मौलाना इजहार, मौलाना जहांगीर, हाफिज मकबूल, हाफिज युसुफ, मौलाना गुलाम रब्बानी, कारी शाहिद फिदाई सहित बड़ी संख्या में असातेजा और तालबा की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, निर्णायकों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह आयोजन हजरत बाबा दुखन शाह (रअ) की याद में आयोजित उर्स मुबारक की रूहानी परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा और प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना गया।
