जोहार हिंदुस्तान | मेरठ/उत्तर प्रदेश: देशभर में सुर्खियों में आए “ब्लू ड्रम मर्डर केस” में, जेल में बंद मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी ने देर आज 24 नवंबर को मेरठ मेडिकल कॉलेज में एक बेटी को जन्म दिया है। इस घटना ने एक बार फिर से इस कुख्यात मामले की खौफनाक दास्तान को ताजा कर दिया है।
मृतक पति सौरभ के जन्मदिन के दिन ही हुआ बेटी का जन्म
मेरठ ड्रम मर्डर केस में एक बेहद भावनात्मक और चौंकाने वाला संयोग सामने आया है। 24 नवंबर जो मृतक सौरभ का जन्मदिन था, उसी दिन उसकी पत्नी और मामले की मुख्य आरोपी मुस्कान ने एक बेटी को जन्म दिया। पति की हत्या और ड्रम में शव छुपाने के आरोप में जेल में बंद मुस्कान को तबीयत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां उसने बच्ची को जन्म दिया। सौरभ के जन्मदिन पर ही उसकी बच्ची का जन्म होना इस पूरे केस को और भी संवेदनशील और चर्चा का विषय बना रहा है।
मामला क्या है — पृष्ठभूमि और हत्या की साज़िश
मृतक सौरभ राजपूत, 35 वर्षीय पूर्व मर्चेंट नेवी अफसर थे। पुलिस के मुताबिक, 4 मार्च 2025 को मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल शुक्ला ने सौरभ की हत्या की।
उन्होंने सौरभ को न सिर्फ चाकू से मारा, बल्कि शरीर के हिस्से काटकर एक ड्रम (प्लास्टिक) में बंद कर दिए और उसमें सीमेंट भर दिया था ताकि शव को छुपाया जा सके।
हत्या की योजना कथित तौर पर महीनों पहले चलने लगी थी। पुलिस के अनुसार, मुस्कान ने नवंबर 2023 से साजिश रची थी।
जांच-पड़ताल में यह भी सामने आया कि मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल को फेक Snapchat आईडी के जरिए यह विश्वास दिलाया कि उसकी मां (जो कि मर चुकी थी) उससे संदेश भेज रही है।
इसके अलावा, आरोप है कि साहिल बहुत श्रृद्धालु था और ब्लैक मैजिक में विश्वास करता था। मुस्कान ने इस विश्वास का फायदा उठाकर उसे अपनी योजना में शामिल किया।
मुस्कान और साहिल की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध 1000 पेज से अधिक का चार्जशीट दायर किया है।
चार्जशीट में हत्या, सावधानीपूर्वक साजिश, सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हत्या का उद्देश्य ब्लैक मैजिक या अलौकिक कारनामों का फल नहीं था।
जेल में रहते हुए, मुस्कान ने कानून की पढ़ाई करने की इच्छा जताई है, ताकि वह कोर्ट में अपनी आत्म-रक्षा कर सके।
सामाजिक और पारिवारिक असर
इस केस ने सिर्फ कानूनी और पुलिस-मामले नहीं खड़े किए, बल्कि मुस्कान के परिवार को गंभीर सामाजिक बहिष्कार से भी गुजरना पड़ा है। उसके घर पर ‘बिक्री के लिए’ का बोर्ड लगा दिया गया है ।
परिवार का कहना है कि शहर में रहना अब उनके लिए बहुत मुश्किल हो गया है, क्योंकि लोगों ने उनसे दूरी बना ली है।
मुस्कान द्वारा बेटी को जन्म देना इस घटना में एक नया और संवेदनशील मोड़ जोड़ता है। यह दिखाता है कि जहां एक तरफ कानूनी लड़ाई और जेल की जिंदगी जारी है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक और पारिवारिक जीवन भी गहरे संकट में है।
यह मामला न सिर्फ एक बेहद क्रूर हत्या की कहानी है, बल्कि विश्वास, धोखे, मानसिक अस्वस्थता और सामाजिक बहिष्कार का त्रासद पहलू भी सामने लाता है।
