जोहार हिंदुस्तान | डेस्क/नई दिल्ली: देश में ब्रांडेड दवाइयों के नाम पर नकली दवा बनाने का बड़ा मामला सामने आया है। प्रतिष्ठित फार्मा कंपनी हिमालया की Liv-52 टेबलेट के नाम पर नकली दवा बनाने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। यह दवा आमतौर पर लिवर की बीमारी और लिवर को स्वस्थ रखने के लिए इस्तेमाल की जाती है, लेकिन इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपियों ने बड़े स्तर पर नकली दवा का नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
जांच एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार नकली दवा बनाने का काम हरियाणा के सोनीपत स्थित फैक्ट्री में किया जा रहा था, जबकि खाली डिब्बे और रैपर उत्तर प्रदेश के मेरठ में तैयार किए जा रहे थे। इसके बाद दवाइयों को पैक कर बाजार में असली दवा बताकर सप्लाई किया जाता था। इस नेटवर्क के जरिए कई राज्यों में दवा भेजे जाने की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस और ड्रग विभाग की टीम ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मयंक अग्रवाल, अनूप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से नकली दवा बनाने और सप्लाई करने के काम में शामिल थे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाइयां लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। ऐसी दवाओं से बीमारी ठीक होने के बजाय मरीज की हालत और बिगड़ सकती है। यही वजह है कि प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि दवा हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें और दवा खरीदते समय पैकिंग और बैच नंबर जरूर जांचें।
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था और किन-किन जगहों पर नकली दवाइयों की सप्लाई की गई थी। प्रशासन का कहना है कि इस मामले में आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।