जोहार हिंदुस्तान | नई दिल्ली: देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया के दौरान बूथ-लेवल ऑफिसर्स (BLO) और चुनाव कर्मचारियों की लगातार मौत पर गंभीर चिंता बढ़ गई है। दावा किया जा रहा है कि वोटर्स की सूची साफ-सुथरी करने के नाम पर SIR के ज़बरदस्त दबाव के चलते BLOs पर इतना तनाव है कि उनकी जानें जा रही हैं।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इन 19 दिनों के भीतर 7 राज्यों में लगभग 17 BLOs की मौत हुई है। इनमें आत्महत्या, हृदयाघात और अन्य कारण शामिल बताए जा रहे हैं।
कुछ नामित मामलों में शामिल हैं।
गुजरात में ऊषा बेन, कल्पनावेन (दोनों सहायक BLO), अरविंद वाढेर, रमेश
पश्चिम बंगाल में शांति मुनि, रिंकू तरफदार, नमिता
उत्तर प्रदेश में विजय कुमार वर्मा
केरल में अनीश जॉर्ज
मध्य प्रदेश में उदयभान सिंह, भुवन सिंह, रामाकांत पांडे, सीताराम गोंड
राजस्थान में मुकेश जांगिड़, हरिओम, और SIR सुपरवाइजर संतराम
तमिलनाडु में जहिता और एक आंगनबाड़ी सेविका (जेहिता के अतिरिक्त एक अन्य आत्महत्या का भी मामला सामने आया है)
विश्लेषकों का कहना है कि SIR के काम की तीव्र गति, ज़्यादा लक्ष्य और कम अवधि में काम पूरा करने की मांग BLOs के लिए बहुत भारी पड़ रही है।
वही कुछ BLOs का कहना है कि वे अपने रोज़मर्रा के सरकारी काम के अलावा SIR की ड्यूटी भी संभाल रहे हैं — घर-घर enumeration फॉर्म बांटना, उन्हें वापस लेना और फिर ऐप पर डेटा भरना। इन सभी जिम्मेदारियों को सीमित समय में पूरा करना उनके लिए बेहद कठिन हो रहा है।
कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने केंद्र पर आरोप लगाया है कि SIR वोट चुराने की एक रणनीति बन गया है, और BLO मौतों को अनदेखा किया जा रहा है।
BLOs की यह स्थिति केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई — यह राजनीतिक लड़ाई का भी केंद्र बन गई है। राजस्थान, पश्चिम बंगाल, केरल जैसे राज्यों में BLOs ने प्रदर्शन किया है और SIR बंद करने की मांग की है।
चुनाव आयोग (ECI) ने अभी तक इस मामले पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है, और न ही उन्होंने मौतों की संख्या या कारणों पर स्पष्ट स्पष्टीकरण दिया है।
